हनुमानगढ़


हनुमानगढ़, 17 अप्रैल। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार लोकसभा आम चुनाव 2024 के परिपेक्ष्य में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 135-ग के प्रावधानों के अनुसरण में जिले में सूखा दिवस रहेगा। जिला कलक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री काना राम ने बताया कि जिले में मतदान दिवस 19 अप्रैल 2024 के लिए 17 अप्रैल 2024 को सायं 6 बजे से 19 अप्रैल 2024 को सायं 6 बजे तक सूखा दिवस रहेगा। इसके अतिरिक्त जिले के जिन मतदान क्षेत्रों में मतदान होंगे, उन मतदान क्षेत्रों के बाहर के सीमावर्ती 3 किलोमीटर परिधि क्षेत्रों में मतदान समाप्ति के 48 घंटे पूर्व से मतदान समाप्ति के दिन सायंकाल 6 बजे तक सूखा दिवस रहेगा। इसी प्रकार पुनर्मतदान की स्थिति में, पुनर्मतदान की घोषणा से पुनर्मतदान की तिथि को पुनर्मतदान की समाप्ति तक संबंधित मतदान केन्द्र, केन्द्रों के क्षेत्रों में सायं 6 बजे तक सूखा दिवस रहेगा। लोकसभा आम चुनाव 2024 के दौरान 4 जून 2024 को मतगणना दिवस के अवसर पर भी सम्पूर्ण जिले में सूखा दिवस घोषित किया गया है।
मतदान दलों और माइक्रो ऑब्जर्वर का तृतीय रेंडमाईजेशन
हनुमानगढ़ के नाम विश्व रिकाॅर्ड वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन से वोट पाती को मिला प्रोविजनल सर्टिफिकेट
सी एम का भले ही फीका रहा हो रोड शो,पर आएगी तो प्रियंका बैलान ही
जिला निर्वाचन अधिकारी ने की मतदाताओं से मतदान के लिए अपील

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बॉलीवुड के बीते जमाने के स्टार जीतेंद्र आज 82 साल के हो गए। तकरीबन चार दशक लंबे करियर में जीतेंद्र ने 'तोहफा', 'हिम्मतवाला', 'कारवां', 'परिचय', 'मवाली' समेत कई हिट फिल्मों में काम किया है। अपने अनोखे डांसिंग स्टाइल की वजह से लोग उन्हें जंपिंग जैक बुलाते थे। जीतेंद्र ने करीब 121 हिट फिल्में दीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें कभी बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड नहीं मिला। कभी 8 साल में 60 फिल्मों में काम करने वाले जीतेंद्र तकरीबन 23 साल पहले एक्टिंग छोड़ चुके हैं। 2001 में उन्हें फिल्म ‘कुछ तो है’ में देखा गया था। इसके बाद वो कुछ टीवी सीरियलों और वेब सीरीज में चंद मिनट के लिए ही नजर आए हैं। एक इंटरव्यू में जीतेंद्र ने तो ये तक कहा था कि उन्हें याद ही नहीं है कि वे कभी एक्टर थे। वैसे, एक्टिंग के अलावा जीतेंद्र ने प्रोडक्शन हाउस से भी मोटी कमाई की, लेकिन फिल्में प्रोड्यूस करते हुए जीतेंद्र दो बार दिवालिया भी हो गए थे। जीतेंद्र ने तब भी हार नहीं मानी और आज उनकी संपत्ति 1512 करोड़ रुपए है। जन्मदिन के मौके पर जानते हैं जीतेंद्र की लाइफ के कुछ दिलचस्प किस्से… राजेश खन्ना थे जीतेंद्र के क्लासमेट जीतेंद्र का जन्म 7 अप्रैल 1942 को अमृतसर (पंजाब) में हुआ था। उनका असली नाम रवि कपूर है। जीतेंद्र के पिता अमरनाथ फिल्म इंडस्ट्री में नकली ज्वेलरी सप्लाई करने का काम करते थे, इसलिए पूरी फैमिली अमृतसर से मुंबई आकर बस गई थी। जीतेंद्र की शुरुआती पढ़ाई सेंट सेबेस्टियन गोअन हाई स्कूल, मुंबई में हुई थी। इसी स्कूल में उनके साथ राजेश खन्ना भी पढ़ते थे और दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। जीतेंद्र ने आगे की पढ़ाई मुंबई के सिद्धार्थ कॉलेज से पूरी की। ज्वेलरी सप्लाई करते-करते बने बॉडी डबल जीतेंद्र जब बड़े हुए तो अपने पिता के बिजनेस में हाथ बंटाने लगे। इसी सिलसिले में एक दिन वे फिल्ममेकर वी शांताराम से मिले। फिर अक्सर ज्वेलरी सप्लाई के सिलसिले में जीतेंद्र का शांताराम की फिल्म कंपनी में आना-जाना लगा रहता था। इसी दौरान उनके मन में हीरो बनने की इच्छा जाग गई। उन्होंने वी शांताराम से किसी फिल्म की शूटिंग देखने की इच्छा जताई। शांताराम ने कहा-सिर्फ शूटिंग देखने से काम नहीं चलेगा। काम करोगे? जीतेंद्र ने तुरंत हामी भर दी। फिल्म 'नवरंग' की शूटिंग के दौरान जीतेंद्र को छोटे-मोटे काम मिल जाया करते थे। लेकिन एक दिन ऐसा आया जब जीतेंद्र की किस्मत चमक गई। ये किस्सा उन्होंने खुद 'द कपिल शर्मा शो' के दौरान सुनाया था। जब कपिल शर्मा ने उनसे पूछा था कि क्या आप स्ट्रगल के दिनों में हीरोइन के बॉडी डबल बने थे? इस पर जीतेंद्र ने कहा था, हां, मैं फिल्म 'सेहरा' की शूटिंग के दौरान जूनियर आर्टिस्ट था। मुझे शांताराम जी की चमचागिरी करनी पड़ती थी, मैं उस वक्त कुछ भी करने को तैयार था। तो एक दिन बीकानेर में शूटिंग के वक्त हीरोइन संध्या जी की कोई बॉडी डबल नहीं मिल रही थी। शांताराम जी ने मुझे संध्या जी का बॉडी डबल बना दिया और इस तरह मेरी फिल्मों में एंट्री हुई। पहली फिल्म की फीस थी 100 रु. शुरुआत में जीतेंद्र को काम तो मिला लेकिन छह महीने तक कोई फीस नहीं मिली। उनसे वी. शांताराम ने वादा किया था कि जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर उन्हें हर महीने 105 रु. दिए जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। फिर जब वी.शांताराम ने जीतेंद्र को 1964 में फिल्म 'गीत गाया पत्थरों ने' से ब्रेक दिया और तब अपनी पहली फिल्म की फीस के तौर पर जीतेंद्र को 100 रु. मिले। 'गीत गाया पत्थरों ने' से जीतेंद्र को ब्रेक तो मिला, लेकिन फिल्म फ्लॉप रही। ऐसे में जीतेंद्र को फिर छोटे-मोटे रोल करके गुजारा करना पड़ा। हालांकि, उनके मन में अब भी सोलो लीडिंग स्टार बनने की तमन्ना थी। 1967 में रिलीज हुई ‘फर्ज’ जीतेंद्र के करियर की पहली हिट फिल्म साबित हुई, लेकिन बतौर लीड स्टार फिल्म इंडस्ट्री में जमना उनके लिए आसान नहीं था। सोलो लीड हीरो बनाने से पहले डायरेक्टर ने रखी जीतेंद्र के सामने शर्त एक बार फिल्ममेकर सुबोध मुखर्जी ने जीतेंद्र से कहा कि वो उन्हें लेकर एक सोलो हीरो फिल्म बनाना चाहते हैं। जीतेंद्र खुश हो गए, लेकिन तभी सुबोध ने एक शर्त रखी। उन्होंने कहा- मैं फिल्म तभी बनाऊंगा, जब हेमा मालिनी इस फिल्म में काम करेंगी। दरअसल, उस दौर में हेमा मालिनी का स्टारडम किसी मेल सुपरस्टार से कम नहीं था। हेमा जिस फिल्म में होती थीं, उसके सफल होने की गारंटी 100% रहती थी। जीतेंद्र भी ये बात भांप गए कि अगर हेमा उनकी हीरोइन बन जाएं तो उनकी भी नैया पार लग जाएगी और वो भी बतौर हीरो स्थापित हो जाएंगे। मगर ये इतना आसान नहीं था। उस समय हेमा के करियर के फैसले उनकी मां जया चक्रवर्ती लेती थीं। जब जीतेंद्र ने उन्हें फिल्म के बारे में बताया तो उन्होंने मना कर दिया। जीतेंद्र उनके पीछे पड़ गए और कहा-आपकी बेटी अगर मेरे साथ फिल्म कर लेगी तो मेरा करियर बन जाएगा। आखिरकार जया मान गईं। जीतेंद्र ने ये बात सुबोध मुखर्जी को बताई और उन्होंने झट से हेमा को फिल्म में साइन कर लिया। हेमा को साइन करके डायरेक्टर ने जीतेंद्र को किया फिल्म से बाहर आगे मामले में ट्विस्ट तब आया जब सुबोध मुखर्जी ने फिल्म में जीतेंद्र के बजाए शशि कपूर को हीरो के तौर पर साइन कर लिया। ये बात जानकर जीतेंद्र के पैरों तले जमीन खिसक गई, जब उन्होंने सुबोध से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, 'फिल्म के प्रोड्यूसर और फाइनेंसर ने कहा है कि जब हीरोइन हेमा मालिनी है तो हीरो भी बड़ा कास्ट करो, जीतेंद्र को लेने की क्या जरूरत। इसलिए मैंने शशि कपूर के साथ फिल्म अनाउंस कर दी।' जीतेंद्र ने जब सुबोध से कहा कि हेमा मेरी वजह से फिल्म में आई हैं तो उन्होंने दो टूक कह दिया कि हम यहां बिजनेस करने बैठे हैं। जीतेंद्र इस बात से मायूस हो गए लेकिन इसी दौरान एल.वी प्रसाद ने उन्हें फिल्म 'जीने की राह' का ऑफर दिया। ये फिल्म सुपरहिट हो गई और जीतेंद्र चमक गए जबकि हेमा और शशि कपूर स्टारर फिल्म 'अभिनेत्री' बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई। हेमा की मां जीतेंद्र से करवाना चाहती थीं बेटी की शादी जब जीतेंद्र बड़े स्टार बन गए तो हेमा की मां जया चक्रवर्ती को वे अपनी बेटी के लिए परफेक्ट लगे। जया, हेमा की उनसे शादी करवाना चाहती थीं। दरअसल, तब हेमा का अफेयर धर्मेंद्र से चल रहा था और संजीव कुमार भी हेमा से शादी का प्रस्ताव उनके घरवालों के सामने रख चुके थे। हेमा की मां को न संजीव कुमार पसंद थे और न ही धर्मेंद्र। वे नहीं चाहती थीं कि हेमा की इन दोनों में से किसी स्टार से शादी हो जबकि जीतेंद्र उन्हें बेटी के लिए पसंद थे। जया चक्रवर्ती ने बेटी हेमा की शादी जीतेंद्र से फिक्स कर दी थी और चेन्नई में दोनों सात फेरे भी लेने वाले थे। तभी धर्मेंद्र शादी के मंडप में जीतेंद्र की गर्लफ्रेंड शोभा को लेकर पहुंच गए और हेमा से उनकी शादी तुड़वा दी थी। इसके कुछ साल बाद जीतेंद्र ने 1974 में गर्लफ्रेंड शोभा से लव मैरिज कर ली थी। श्रीदेवी के साथ हर फिल्म में काम करना चाहते थे जीतेंद्र 1983 में जीतेंद्र ने फिल्म 'हिम्मतवाला' में श्रीदेवी के साथ पहली बार काम किया था। दोनों की जोड़ी को काफी पसंद किया गया। यही वजह है कि एक दौर ऐसा आया जब जीतेंद्र हर फिल्म में केवल श्रीदेवी के साथ ही काम करना चाहते थे। शक्ति कपूर ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'जीतेंद्र को 'हिम्मतवाला' में श्रीदेवी का काम इतना पसंद आया था कि उन्होंने डायरेक्टर राघवेंद्र से कहा कि वे अपनी सभी फिल्मों में उनके अपोजिट केवल श्रीदेवी को बतौर हीरोइन साइन करें।' यही वजह थी कि 'हिम्मतवाला' के बाद राघवेंद्र राव ने जब 'जानी दोस्त' (1983), 'जस्टिस चौधरी' (1983), 'तोहफा' (1984), 'सुहागन' (1986), 'धर्माधिकारी' (1986) और 'दिल लगाके देखो' (1988) फिल्में बनाईं तो उन्होंने इनमें श्रीदेवी को ही लिया। जीतेंद्र को रेखा ने दी थी श्रीदेवी के साथ काम करने की सलाह एक इंटरव्यू में जीतेंद्र ने फिल्म 'हिम्मतवाला' में श्रीदेवी के साथ काम करने के बारे में बात की थी। उन्होंने कहा था, 'श्रीदेवी के साथ काम करने की सलाह मुझे रेखा ने दी थी। एक दिन मैं और रेखा, श्रीदेवी की कोई तेलुगु फिल्म देख रहे थे। रेखा ने मुझसे कहा, 'तुम्हें श्रीदेवी के साथ जरूर काम करना चाहिए। उस वक्त रेखा के पास 'हिम्मतवाला' के लिए डेट्स नहीं थी। वे फिल्म में काम करने से मना कर चुकी थीं। ऐसे में मैंने राघवेंद्र राव को श्रीदेवी को कास्ट करने का सुझाव दिया और वे मान गए। इस तरह 'हिम्मतवाला' में श्रीदेवी की एंट्री हुई। श्रीदेवी का डांस में कोई मुकाबला नहीं था। जब 'हिम्मतवाला' की शूटिंग के दौरान डांस मास्टर हमें स्टेप्स सिखाते थे तो श्रीदेवी केवल दो रिहर्सल में ही स्टेप्स सीख जाती थीं और मैं कई बार प्रैक्टिस करता था लेकिन वे भी मेरे साथ तब तक रिहर्सल करती थीं, जब तक मैं अपना डांस स्टेप परफेक्ट तरीके से न कर लूं।' 8 साल में 60 फिल्मों में काम किया 1975 के आसपास जब जीतेंद्र को बतौर हीरो फिल्में मिलना बंद हो गईं तो उनकी फाइनेंशियल कंडीशन काफी खराब हो गई थी। इसके बाद जीतेंद्र दूसरी बार तब दिवालिया हुए जब उन्होंने फिल्म प्रोड्यूस करने के बारे में सोचा। 1982 में उन्होंने फिल्म 'दीदार-ए-यार' बनाई जो कि फ्लॉप साबित हुई। इससे जीतेंद्र को काफी नुकसान हुआ। खराब आर्थिक स्थिति से उबरने के लिए जीतेंद्र ने 8 साल में 60 फिल्मों में काम किया। जीतेंद्र के इतनी फिल्में करने पर लोग उन्हें इनसिक्योर एक्टर तक कहने लगे थे, लेकिन जीतेंद्र को इसमें कुछ गलत नहीं लगता। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, 'मैंने 8 साल में लगातार 60 फिल्में इसलिए कीं, क्योंकि ये सच है कि 1980 के दौर में मैं काफी इनसिक्योर था। मैं गोरेगांव की चॉल से उठा व्यक्ति हूं। मैंने वो समय देखा है, जब मेरे घर में पंखा लगा था तो पूरी चॉल के लोग उसे देखने के लिए आए थे। मैंने बुरा दौर करीब से देखा है, इसलिए मैं पागलों की तरह काम करता था।' मैं जॉबलैस हूं' जीतेंद्र 23 साल से फिल्मों से दूर हैं, लेकिन इसके बावजूद वे 1512 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने प्रोडक्शन हाउस बालाजी टेलीफिल्म्स, ऑल्ट बालाजी और बालाजी मोशन पिक्चर के जरिए उनकी सालाना कमाई 300 करोड़ रु. तक है। जीतेंद्र ने कुछ साल पहले एक इंटरव्यू में कहा था, '20 से ज्यादा साल हो गए, मैं जॉबलैस एक्टर हूं। मैंने अपना एक रुपया नहीं कमाया है। शोभा (पत्नी) और एकता (बेटी) सब काम संभालती हैं। मेरा योगदान केवल इतना है कि मैंने उस पैसे को सही जगह इन्वेस्ट किया है जो कि उन्होंने कमाया है और वो सारे इन्वेस्टमेंट मेरे लिए फायदेमंद साबित हुए हैं।' शराब-सिगरेट को 22 साल से हाथ नहीं लगाया जीतेंद्र ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वे पहले खूब सिगरेट और शराब पीते थे, लेकिन 22 साल पहले ये सब छोड़ चुके हैं। जीतेंद्र ने कहा था-जवानी के दिनों में मैंने अपनी हेल्थ के साथ जितने खिलवाड़ करने थे, सब कर चुका। लेकिन जब मैं 60 साल का हुआ तो मैंने ये सब छोड़ दिया। लोग मुझे इस उम्र में भी फिट होने पर कॉम्प्लीमेंट देते हैं तो मैं उन्हें भी ये सब छोड़ने की सलाह देता हूं। आज के दौर में मुझे सलमान खान और ऋतिक रोशन की फिटनेस बहुत अच्छी लगती है।
9 फिल्‍में और दांव पर 600 करोड़, अक्षय-अजय देवगन के लिए ईद पर सलमान का रिकॉर्ड तोड़ पाना लगभग नामुमकिन!
‘बिग बॉस देख रहे हैं’: गृह मंत्रालय के चप्पे-चप्पे पर अब तीसरी आंख से नजर
66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का ऐलान, अंधाधुन बेस्ट हिंदी फिल्म, आयुष्मान और विकी कौशल बेस्ट ऐक्टर
विवादित वीडियो मामला: मुश्किल में एजाज खान, कोर्ट ने 1 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा

राजस्थान


कोटा,कोटा में बीजेपी कार्यकर्ता के मकान के बाहर एक धमकी भरा कागज चिपका मिला। कागज पर लिखा है- ' अल्लाह का पैगाम, गुस्ताख रसूल की एक ही सजा,सर तन से जुदा, सर तन से जुदा'। इसके बाद से बीजेपी कार्यकर्ता का पूरा परिवार दहशत में है। कार्यकर्ता ने उद्योगनगर थाने में मामला दर्ज करवाया है। SHO जितेंद सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। शहर के उद्योग नगर इलाके में भाजपा ओबीसी मोर्चा जिलाउपाध्यक्ष मनोज सुमन का घर है। उनके घर के बाहर कोई धमकी भरा कागज चिपका कर चला गया। उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह 7 बजे के करीब कागज लगा मिला। एक कागज नीचे पड़ा हुआ था। दोनों कागजों में 'सर तन से जुदा, सर तन से जुदा' की धमकी लिखी थी। कागज में लिखा था- 'सुन अब तुझे तेरा राम बचाता है, या तेरा हिंदू धर्म। अब तेरी आवाज भी बंद हो जाएगी। अब हम तुझे नहीं छोड़ने वाले हैं। अल्लाह के बंदे हैं, अब तेरा सर तन से जुदा होकर रहेगा। मनोज.. अब तेरा समय आ गया है और अब तुझे और तेरे परिवार को हमसे कौन बचाता है। आखिरी में नीचे लिखा है, अल्लाह हाफिज। जनवरी में हुआ था विवाद मनोज ने बताया कि वो मंडी में लहसुन का काम करते है। जनवरी महीने में अयोध्या में श्रीराम प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर कॉलोनी में भगवा झंडे लगाए थे। मंदिर के पास बकरा बांधने को लेकर भी विवाद हुआ था। जनवरी महीने में तीन दिन 19, 21 व 24 विवाद हुआ था। मुझे जान से मारने और बम से उड़ाने की धमकी दी थी, जिसकी शिकायत थाने में दी थी। घटना के बाद आज अज्ञात व्यक्ति मेरे मकान के बाहर धमकी भरा कागज लगाकर गया है। पूरा परिवार दहशत में है। इसकी शिकायत थाने में दी है। उद्योगनगर थाना SHO जितेंद सिंह ने बताया कि मनोज की शिकायत पर मामला दर्ज किया है। मामले की जांच की जा रही है। कार्रवाई की मांग भाजपा शहर जिला अध्यक्ष राकेश जैन भी कार्यकर्ताओं के साथ उद्योग नगर थाने पहुंचे। धमकी भरा कागज लगाने में वाले की पहचान कर गिरफ्तारी की मांग की। राकेश जैन ने कहा कि पीड़ित को पुलिस सुरक्षा दी जाए। अगर पीड़ित के साथ कुछ हादसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन व चुनाव आयोग की होगी।
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'यह पहला लोकसभा चुनाव है जिसका परिणाम पहले से तय है...' दौसा में योगी आदित्यनाथ ने दिखाया दम !
केजरीवाल की गिरफ्तारी-रिमांड पर फैसला सुरक्षित:ED ने हाईकोर्ट से कहा- अंधेरे में तीर नहीं चलाया; वॉट्सऐप चैट-हवाला ऑपरेटर्स के बयान हैं
कांग्रेस के दिग्गजों समेत 113 नेताओं ने जॉइन की बीजेपी

बहुत कुछ


कांकेर,लोकसभा चुनाव के पहले छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। कांकेर जिले के माड़ इलाके में सुरक्षाबलों ने 29 नक्सलियों को ढेर कर दिया। सभी के शव बरामद हो गए हैं। इनमें नक्सली लीडर शंकर राव भी शामिल है। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने इसे बस्तर पुलिस का नक्सलवाद पर सर्जिक स्ट्राइक बताया है। मुठभेड़ में BSF इंस्पेक्टर रमेश चौधरी सहित 3 जवान घायल हुए हैं। इनमें 2 DRG के जवान हैं। मौके से 5 AK-47 बरामद की गई। घायल जवानों को हेलीकॉप्टर से रायपुर लाया गया। DRG का घायल जवान सूर्यवंशी श्रीमाली धमतरी जिले के नगरी का रहने वाला है। कांकेर सीट पर 26 अप्रैल को मतदान होगा 4 दिन बाद 19 अप्रैल को बस्तर लोकसभा में वोटिंग होनी है। कांकेर लोकसभा में दूसरे चरण में मतदान होना है। इसके लिए नामांकन फॉर्म भी भरे जा चुके हैं। कांकेर में 26 अप्रैल को वोटिंग होगी। मुठभेड़ में मारे गए शंकर राव और ललिता माड़वी डीवीसी रैंक के नक्सली लीडर थे। दोनों पर 25-25 लाख का इनाम घोषित था। पुलिस ने मौके से 4 ऑटोमेटिक हथियार भी जब्त किए हैं। साढ़े पांच घंटे चली मुठभेड़ सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ साढ़े 5 घंटे चली। DIG इंटेलिजेंस आलोक कुमार सिंह ने बताया, पिछले कुछ दिनों से कांकेर इलाके में नक्सलियों के मूवमेंट के इनपुट्स मिल रहे थे। इसके बाद पुलिस और BSF ने ऑपरेशन की तैयारी की। इसी के तहत आज का ऑपरेशन प्लान किया गया। नक्सलियों को दोपहर करीब एक बजे घेर लिया गया। 2 बजे मुठभेड़ शुरू हुई और शाम को 7.30 बजे तक यह चली। इस दौरान, सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के शव भी बरामद भी किए। गांव-गांव में लग रहे नक्सलियों के पोस्टर कबीरधाम जिले में नक्सलियों की सूचना देकर उन्हें पकड़वाने वाले को 5 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की गई है। एसपी अभिषेक पल्लव ने इनाम के साथ ही पुलिस विभाग में सरकारी नौकरी देने का भी ऐलान किया है। सूचना देने के लिए एक हेल्प लाइन नंबर 78988 15399 भी जारी किया गया है। इसके लिए जवान गांव-गांव में नक्सलियों की तस्वीर वाली पोस्टर दीवारों पर लगा रहे हैं।
यूपी में NDA की बल्ले-बल्ले, I.N.D.I.A. को बड़ा झटका, देखिए किसे मिलेगी कितनी सीटें?
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असम : रामनवमी के अवसर पर आज अयोध्या के राम मंदिर में रामलला का सूर्य तिलक किया गया। यह अद्भुत अवसर था। दर्पण और लेंस से युक्त एक विस्तृत सिस्टम के द्वारा यह प्रक्रिया संपन्न कराई गई। इस सिस्टम के द्वारा सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक तक पहुंची। रामनवमी के मौके पर श्रद्धालुओं को यह अद्बभुत दृश्य देखने को मिला। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अद्भुत क्षण के वीडियो के टैब के माध्यम से देखा। यह वीडियो देखकर वे श्रद्धा से भावविभोर नजर आए। अद्भुत क्षण का गवाह बनने की अपील दरअसल, आज प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार के सिलसिले में असम के नलबारी में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अपने संबोधन में लोगों से इस अद्भुत क्षण का गवाह बनने की अपील भी की। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान मोबाइल की फ्लैश लाइट जलवाई और जय श्रीराम के नारे लगवाए। पीएम मोदी ने कहा कि लोग इस अद्भुत क्षण के साक्षी बनें। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हेलिकॉप्टर में बैठकर पूरी श्रद्धा के साथ 'सूर्य तिलक' के वीडियो को टैब पर देखा। हेलिकॉप्टर में जूता उतारकर देखा वीडियो इस वीडियो को देखने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जूते उतार दिए और पूरी श्रद्धा के साथ सूर्य तिलक के अद्भुत पल के साक्षी बने। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दौरान हृदय पर हाथ रखकर और शीश झुकाकर भगवान राम को नमन करते भी नजर आ रहे हैं। पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इससे जुड़ा एक पोस्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा- नलबाड़ी की सभा के बाद मुझे अयोध्या में रामलला के सूर्य तिलक के अद्भुत और अप्रतिम क्षण को देखने का सौभाग्य मिला। श्रीराम जन्मभूमि का ये बहुप्रतीक्षित क्षण हर किसी के लिए परमानंद का क्षण है। ये सूर्य तिलक, विकसित भारत के हर संकल्प को अपनी दिव्य ऊर्जा से इसी तरह प्रकाशित करेगा। हर साल रामनवमी पर किया जाएगा सूर्य तिलक बता दें कि सूर्य तिलक लगभग चार-पांच मिनट के लिए किया गया। यह वह घड़ी थी जब सूर्य की किरणें सीधे राम लला की मूर्ति के माथे पर केंद्रित थीं। मंदिर प्रशासन ने भीड़भाड़ से बचने के लिए सूर्य तिलक के समय भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश करने से रोक दिया था। सूर्य तिलक परियोजना का मूल उद्देश्य रामनवमी के दिन श्री राम की मूर्ति के मस्तक पर एक तिलक लगाना है। हर साल चैत्र माह में श्री रामनवमी पर दोपहर 12 बजे से भगवान राम के मस्तक पर सूर्य की रोशनी से तिलक किया जाएगा । हर साल इस दिन आकाश पर सूर्य की स्थिति बदलती है।
मोदी बोले- जम्मू-कश्मीर को फिर राज्य का दर्जा मिलेगा:कहा- कुछ लोग मुगलों की तरह सावन-नवरात्रि में मटन का वीडियो डालकर चिढ़ाते हैं
मोदी बोले- भारत-चीन बॉर्डर विवाद पर तत्काल चर्चा जरूरी:अमेरिकी मैगजीन से कहा- डिप्लोमैटिक-मिलिट्री लेवल पर बात करके शांति कायम कर सकते हैं
बस्तर से पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा- शाही परिवार ने ठुकराया राम मंदिर का न्यौता
देखो कौन आया, बीजेपी का शेर आया' पीएम मोदी के रोड शो में उमड़ी भीड़, हर तरफ जिंदाबाद के नारे

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taaja khabar...काला धनः भारत को स्विस बैंक में जमा भारतीयों के काले धन से जुड़ी पहली जानकारी मिली...SPG सिक्यॉरिटी पर केंद्र सख्त, विदेश दौरे पर भी ले जाना होगा सिक्यॉरिटी कवर, कांग्रेस बोली- निगरानी की कोशिश....खराब नहीं हुआ था इमरान का विमान, नाराज सऊदी प्रिंस ने बुला लिया था वापस ....करीबियों की उपेक्षा से नाराज हैं राहुल गांधी? ताजा घटनाक्रम और कुछ कांग्रेस नेता तो इसी तरफ इशारा कर रहे हैं....2 राज्यों के चुनाव से पहले राहुल गांधी गए कंबोडिया? पहले बैंकॉक जाने की थी खबर...2019 में चिकित्सा क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार का ऐलान, 3 वैज्ञानिकों को संयुक्त रूप से मिला...चीन सीमा पर तोपखाने की ताकत बढ़ा रहा भारत, अरुणाचल प्रदेश में तैनात करेगा अमेरिकी तोप....J-K: पुंछ में PAK ने की फायरिंग, सेना ने दिया मुंहतोड़ जवाब ...राफेल में मिसाइल लगाने वाली कंपनी बोली, ‘भारत को मिलेगी ऐसी ताकत जो कभी ना थी’ ..

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